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तुझको चलना होगा ...

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राहें तेरी दुश्वार सही
फूल नहीं तो खार सही
रस्ते सब अनजान सही
साथ कोई न अपना होगा
फिर भी तुझको चलना होगा
मौसम सब वीरान लगे
जीवन चटियल मैदान लगे
हर साथी अनजान लगे
नींद नहीं न सपना होगा
फिर भी तुझको चलना होगा
हो चाहे रात या घना अँधेरा
पलको पे आंसू का पहरा
भटको चाहे सहरा सहरा
छालों को भी सहना होगा
फिर भी तुझको चलना होगा .
जब चलना ही जीवन है ,
तो काँटों को उपवन जानो
आंसुओं के फूल खिला कर
दुःख को तुम छलना सीखो
क्यों न ऐसे चलना सीखो .

.

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34 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

sadguruji के द्वारा
January 2, 2015

नववर्ष मंगलमय हिओ ! बहुत बहुत बधाई !

bhanuprakashsharma के द्वारा
December 29, 2013

सुंदर व प्रेरणा से भरपूर

Madan Mohan saxena के द्वारा
December 18, 2013

सुन्दर कबिता ,कभी इधर भी पधारें सादर मदन

harirawat के द्वारा
December 16, 2013

सुन्दर दिलचस्प कविता के लिए बहुत सारी बधाइयां सीमाजी !

jlsingh के द्वारा
December 4, 2013

जब चलना ही जीवन है , तो काँटों को उपवन जानो आंसुओं के फूल खिला कर दुःख को तुम छलना सीखो क्यों न ऐसे चलना सीखो . बहुत ही सुन्दर अभिव्यक्ति, आदरणीया सीमा जी!

    seemakanwal के द्वारा
    December 4, 2013

    hardik abhar .

bhanuprakashsharma के द्वारा
November 28, 2013

सुंदर अभिव्यक्ति। 

    seemakanwal के द्वारा
    December 2, 2013

    abhar bhanuji ,.

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
November 28, 2013

प्रेरणाप्रद सुन्दर प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई सीमा जी !

    seemakanwal के द्वारा
    December 2, 2013

    dhanywad acharyaji .

yamunapathak के द्वारा
November 27, 2013

बहुत सुन्दर सीमा jee

    seemakanwal के द्वारा
    December 2, 2013

    bahut abhar ymunaji .

yatindranathchaturvedi के द्वारा
November 27, 2013

विचारणीय महत्वपूर्ण सुन्दर प्रस्तुति सादर

    seemakanwal के द्वारा
    December 2, 2013

    hardik dhanywad .

sinsera के द्वारा
November 26, 2013

सच है सीमा जी,राह में कांटे हो, पांव में छाले हों फिर भी चलना होगा, चलना पड़ता है…

    seemakanwal के द्वारा
    December 2, 2013

    hardik abhar sritaji .

sadguruji के द्वारा
November 26, 2013

जब चलना ही जीवन है , तो काँटों को उपवन जानो आंसुओं के फूल खिला कर दुःख को तुम छलना सीखो.अच्छी कविता के लिए बधाई.

    seemakanwal के द्वारा
    December 2, 2013

    bahut dhanywad .saadar .

avdhesh के द्वारा
November 26, 2013

जब चलना ही जीवन है , तो काँटों को उपवन जानो  आंसुओं के फूल खिला कर  दुःख को तुम छलना सीखो ” बेहतरीन रचना के लिए बधाई – भवदीय – अवधेश राणा

    seemakanwal के द्वारा
    November 26, 2013

    abhar avdeshji .

nishamittal के द्वारा
November 26, 2013

हिम्मत न हारना अकेला चल चला चल

    seemakanwal के द्वारा
    November 26, 2013

    dhanywad nishaji .sadar .

yogi sarswat के द्वारा
November 26, 2013

मौसम सब वीरान लगे जीवन चटियल मैदान लगे हर साथी अनजान लगे नींद नहीं न सपना होगा फिर भी तुझको चलना होगा हो चाहे रात या घना अँधेरा पलको पे आंसू का पहरा भटको चाहे सहरा सहरा छालों को भी सहना होगा फिर भी तुझको चलना होगा प्रेरणा देते सुन्दर शब्द आदरणीय सीमा कंवल जी !

    seemakanwal के द्वारा
    November 26, 2013

    abhar yogiji .

DR. SHIKHA KAUSHIK के द्वारा
November 25, 2013

sundar v sarthak prastuti hetu badhai

    seemakanwal के द्वारा
    November 26, 2013

    abhar shikhaji .

deepakbijnory के द्वारा
November 25, 2013

मौसम सब वीरान लगे जीवन चटियल मैदान लगे हर साथी अनजान लगे नींद नहीं न सपना होगा फिर भी तुझको चलना होगा WAAH SEEMA JI BAHUT KHOOB

    seemakanwal के द्वारा
    November 26, 2013

    dhanywad deepakji .

lalitpratapchhapar के द्वारा
November 24, 2013

सतत चलते रहना ही तो जीवन की पहचान है| सुन्दर रचना के लिए आपको हार्दिक बधाई

    seemakanwal के द्वारा
    November 25, 2013

    abhar prtapji rchna aap ko psand aai .

alkargupta1 के द्वारा
November 24, 2013

निरंतर चलते रहने में ही जीवन की सार्थकता है….जीवन की सत्यता को बयां करती सार्थक रचना सीमा जी

    seemakanwal के द्वारा
    November 24, 2013

    sadar abhar alkaji .

sanjeevtrivedi के द्वारा
November 24, 2013

सुन्दर रचना के लिये बधाई

    seemakanwal के द्वारा
    November 24, 2013

    dhanywad sanjeevji .


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