kavita

Just another weblog

72 Posts

1087 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 10099 postid : 643894

बुरा जो देखन मैं चला ....

Posted On: 11 Nov, 2013 Others,कविता,ज्योतिष में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

एक बार शेख सादी अपने पिता जी के साथ हज करने जा रहे थे रास्ते में रात
होने पर दोनों पिता पुत्र रात बिताने के लिए एक धर्मशाला में रुके |शेख
सादी अपने पिता कि तरह नमाज़ के बड़े पाबंद थे |सुबह होने पर वो अपने
पिता के साथ प्रातः काल नमाज़ के लिए उठे तो उन्होंने देखा कि सराय में
अधिकतर लोग सो रहे थे |शेख सादी को लोगो को सोता देखकर बड़ा क्रोध
आया |गुस्से में वो अपने पिता से बोले “अब्बा हुज़ूर देखिये कैसे खराब और
आलसी और निकम्मे लोग हैं ,सुबह का वक़त नमाज़ का होता है और ये
लोग कैसे मज़े से सो रहे हैं शर्म भी नहीं आती इन्हें |
शेख सादी के पिता ने उत्तर दिया “बेटा तू भी न उठता तो अच्छा होता सुबह
उठकर दूसरों कि कमियां निकलने से बेहतर है कि न उठा जाये “|उसी दिन
से शेख सादी ने निर्णय लिया कि वे अब किसी कि बुराई नहीं देखेंगे |अपनी
इसी सोच से वे आगे चलकर एक महान संत बने |

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (2 votes, average: 3.50 out of 5)
Loading ... Loading ...

14 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

sinsera के द्वारा
November 23, 2013

बहुत सुन्दर सन्देश देती कथा शेयर करने के लिए आभार सीमाजी, बिलकुल गागर में सागर…वास्तव में कर्म करता हुआ मनुष्य ही जागृत है वर्ना जगे हुए भी सोये के सामान है..

    seemakanwal के द्वारा
    November 23, 2013

    hardik abhar saritaji

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
November 22, 2013

प्रेरक लघुकथा के लिए सीमा जी ! आप को बधाई !!

    seemakanwal के द्वारा
    November 23, 2013

    saadar abhar acharyaji .

sanjay kumar garg के द्वारा
November 20, 2013

सीमा जी, सदर नमन! अच्छी शिक्षा प्रद कथा, बधाई!

    seemakanwal के द्वारा
    November 20, 2013

    abhar sanjayji .

DR. SHIKHA KAUSHIK के द्वारा
November 19, 2013

bahut shikhsaprad laghu katha .aabhar

    seemakanwal के द्वारा
    November 20, 2013

    dhanywad shikhaji

sadguruji के द्वारा
November 19, 2013

बहुत शिक्षाप्रद लघुकथा.ऐसे प्रेरक प्रसंग आप प्रकाशित करते रहिये.

    seemakanwal के द्वारा
    November 19, 2013

    hardik abhar sadguruji .

harirawat के द्वारा
November 18, 2013

शिक्षाप्रद सुन्दर अभिव्यक्ति ! साभार सीमाजी ! हरेन्द्र जागते रहो

    seemakanwal के द्वारा
    November 19, 2013

    hardik dhanywad rawatji .

Imam Hussain Quadri के द्वारा
November 12, 2013

सीमा जी बहुत ही सही है मगर आज बहुत मुश्किल है के चुप रहा जाय वैसे पूरा शेर ये है के : बुरा जो ढूंढन मैं चला बुरा मिला न कोय : आपण आप जो परखा मुझ से बुरा न कोय वैसे आप कि सोच को सादर प्रणाम .

    seemakanwal के द्वारा
    November 13, 2013

    bahut shukriya imamji .


topic of the week



latest from jagran