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धूल धूसरित फूल हैं ....

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basant filesधूल धूसरित फूल हैं
विधाता की ये भूल है .
ये भी बन सकते थे
किसी बगिया के फूल कली
लेकिन इनकी किस्मत में
सडकें और तंग गली .
ढाबे ,दुकान ,होटल इनके
बसते और स्कूल है .
धुल धूसरित फूल हैं .
झिलमिल टूटे तारे हैं,
फिर भी नहीं ये हारे हैं
अपने निर्बल मां -बाप के
ये कमज़ोर सहारे है ,
छोटे -छोटे हाथों से
बड़े ,बड़े ये काम करें
आराम नहीं जीवन में
काम ही उसूल है
धुल धूसरित फूल हैं .
कुछ इनके भी सपने होंगे
इनके भी कुछ अपने होंगे
इनकी भी कुछ चाहत होगी
कैसे इनको राहत होगी
कड़ी धूप में पाँव जले
जीवन इनको खूब छले
हाथों में पुष्पों की जगह
चुभे जा रहे शूल हैं
धुल धूसरित फूल हैं

धूल धूसरित फूल हैं

विधाता की ये भूल है .

ये भी बन सकते थे

किसी बगिया के फूल कली

लेकिन इनकी किस्मत में

सडकें और तंग गली .

ढाबे ,दुकान ,होटल इनके

बसते और स्कूल है .

धुल धूसरित फूल हैं .

झिलमिल टूटे तारे हैं,

फिर भी नहीं ये हारे हैं

अपने निर्बल मां -बाप के

ये कमज़ोर सहारे है ,

छोटे -छोटे हाथों से

बड़े ,बड़े ये काम करें

आराम नहीं जीवन में

काम ही उसूल है

धुल धूसरित फूल हैं .

कुछ इनके भी सपने होंगे

इनके भी कुछ अपने होंगे

इनकी भी कुछ चाहत होगी

कैसे इनको राहत होगी

कड़ी धूप में पाँव जले

जीवन इनको खूब छले

हाथों में पुष्पों की जगह

चुभे जा रहे शूल हैं

धुल धूसरित फूल हैं

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13 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

yogi sarswat के द्वारा
October 29, 2013

मुझे आपकी कविता पढकरऐसे लगा जैसे फूल और इंसान कि किस्मत एक सी हो ! कहीं कुछ फूल हैं जो मालाओं में गुंथे जाते हैं कुछ अर्थी पर चढ़ाये जाते हैं कुछ भगवान् के कदमों में अपनी किस्मत पाकर चहचहहाते हैं ऐसे ही कुछ इंसान हैं कहीं गलियों में , कहीं बड़े बड़े कालीनों में ! बढ़िया तुलना हो सकती है ! बहुत सुन्दर शब्द

Anuj Diwakar के द्वारा
October 17, 2013

भावपूर्ण रचना ….!!!

    seemakanwal के द्वारा
    October 20, 2013

    हार्दिक आभार अनुजजी .

vijay के द्वारा
October 3, 2013

वाकई में इन फूलो की देख रेख करने वाला कोई नहीं है अभावग्रस्त ,संकटग्रस्त बचपन कभी देश का अच्छा भविष्य नहीं हो सकता एक मजबूत राष्ट्र के लिए इन फूलो का खिलना बहुत ज़रूरी है सुंदर रचना बधाई

    seemakanwal के द्वारा
    October 3, 2013

    प्रतिक्रिया हेतु हार्दिक धन्यवाद .

jlsingh के द्वारा
October 2, 2013

कुछ इनके भी सपने होंगे इनके भी कुछ अपने होंगे इनकी भी कुछ चाहत होगी कैसे इनको राहत होगी कड़ी धूप में पाँव जले जीवन इनको खूब छले हाथों में पुष्पों की जगह चुभे जा रहे शूल हैं धुल धूसरित फूल हैं बहुत ही मर्माहत करनेवाली रचना! सादर सीमा जी!

    seemakanwal के द्वारा
    October 2, 2013

    हार्दिक आभार आदरणीय जवाहर जी .

seemakanwal के द्वारा
October 1, 2013

हार्दिक धन्यवाद निशाजी .

nishamittal के द्वारा
October 1, 2013

सीमा जी ,अति सुन्दर प्रस्तुति

yatindranathchaturvedi के द्वारा
October 1, 2013

बेहतरीन,सादर

    seemakanwal के द्वारा
    October 1, 2013

    हार्दिक आभार यतीन्द्र जी .

September 30, 2013

कड़ी धूप में पाँव जले जीवन इनको खूब छले हाथों में पुष्पों की जगह चुभे जा रहे शूल हैं धुल धूसरित फूल हैं सुन्दर भावाभिव्यक्ति .बधाई

    seemakanwal के द्वारा
    October 1, 2013

    धन्यवाद शालिनी जी .


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