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हिंदी ब्लागिंग हिंदी को मान दिलाने में सार्थक हो सकती है या यह भी बाज़ार का एक हिस्सा बन के रह जाएगी |contest

Posted On: 20 Sep, 2013 Contest में

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आज चाहे चारों तरफ अंग्रेजी का कितना ही बोलबाला क्यूँ न हो पर हिंदी का अपना अलग
शालीनतापूर्ण चरित्र है |चाहे हम कितनी भी इंग्लिश बोल लें अंत में आना अपनी ही भाषा
पर पड़ता है |वैसे भी चाहे कितना भी अंग्रेजी बोल लें या कोई रचना पढ़ी जाये उसमें उतना
रस नहीं आता जितना अपनी भाषा में पढनेमें आता है |
यही बात लेखन पर भी लागू होती है चूं की हिंदी हमारी मादरी भाषा है ,उसे हम जन्म
के साथ समझते हैं और फिर धीरे -धीरे बोलने लगते हैं तो जितना अच्छा हम अपने मात्र
भाषा में लिख पाएंगे उतना दूसरी भाषा में नहीं लिख सकते चाहे वह कोई भी विधा हो |
………………………………….पहले जिन लोगों को लिखने का शौक होता था ,वे अपनी
रचनाएँ पत्र -पत्रिकाओं में भेजते थे जो अक्सर खेद सहित वापस आ भी जाती थी और
अगर छपती तो भी काट -छांट कर |अब कम्प्यूटर के समय में लेखको को एक एक खुला
मंच मिल गया है जिससे वो अपनी बात ज्यूँ का त्यूं रख सकते है |किसी भी विधा में
आसानी से अपनी रचना बिना काटे छांटे लिखी जा सकती है ,अब कटने छंटने का कोई
डर नहीं है |
हिंदी भाषा में लिखना मेरे विचार से हिंदी ब्लागिंग को बढ़ावा ही दे रहा है |अधिक से अधिक
लोग अंतर्जाल का उपयोग कर ब्लाग लेखन कर रहे हैं |मुझे स्वयम मेरे भाई ने कहा की
तुम्हें लिखने का शौक है तो कोई ब्लाग की साईट देख कर उसकी सदस्य बन जाओ
तुम्हारी रचनात्मकता को बढ़ावा मिलेगा |उन्होंने खुद जागरण जंक्शन का मंच खोज
कर दिया था |
मेरे परिचितों में कई लोग ब्लाग लेखन करते हैं ,सभी हिंदी भाषा में अपनी रचना लिखते हैं|
स्वयम जागरण जंक्शन मंच पर भी हजारों लेखक होंगे जो हिंदी में लिखते है ऐसे और
बहुत से ब्लाग की साईट हैं जिसमे अनगिनत लोग हिंदी भाषा का प्रयोग करते हैं तो क्या
ये हिंदी भाषा के लिए सार्थक कदम नहीं है ?मेरे विचार से तो है |
अपनी भाषा अपना गौरव होती है ,देश का अभिमान होती है ,और ओउरे देश को एकता
के सूत्र में पिरोती है |चाहे हम कितनी भी अंग्रेजी भाषा का प्रयोग कर लें आना फिर अपनी ही
भाषा पे है |हिंदी भाषा में हमारे विचार प्रवाहित होते है ,ह्रदय से निकलते है और कागज़
पर जन्म लेते है और जो बात दिल से निकलती है ,वही सच्ची और खरी होती है |
………………………….हिंदी भाषा हमारे जीवन का अभिन्न अंग है ,विचारों के आदान
प्रदान का आवश्यक तत्व है |हिंदी भाषा का चरित्र सहज ,सरल और वैज्ञानिक है तो ऐसी
भाषा में लेखन बाज़ार का हिस्सा कदापि नहीं बन सकता है |हिंदी में ब्लागिंग एक क्रांतिकारी
और सार्थक कदम है |
यश मालवीय जी ने कितना सही लिखा है -
भाषा के भविष्य को लेकर
हमें डराओ ना ,
बहुत हो चुका,हिंदी से
दासता कराओ ना .
इसकी अपनी आन बान है
जगमग करता संविधान है
सपनों सी है देवनागरी ,
निंदिया में भी धान पान है
इसको बेचो नहीं ,
की अपना नाम धराओ ना
भाषा के भविष्य को लेकर
हमें डराओ ना ….

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28 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

seemakanwal के द्वारा
September 30, 2013

हार्दिक आभार बिनोद जी .

Binod Kumar के द्वारा
September 29, 2013

बहुत अच्छा सीमा जी आपने यह पोस्ट किया हैं| बिलकुल सही कहा हैं आपने की हिंदी भाषा हमारे जीवन का अभिन्न अंग है|

Santlal Karun के द्वारा
September 25, 2013

हिन्दी ब्लॉगिंग पर नवीन विचारों की प्रभावपूर्ण प्रस्तुति; हार्दिक साधुवाद एवं सद्भावनाएँ ! … “पहले जिन लोगों को लिखने का शौक होता था ,वे अपनी रचनाएँ पत्र -पत्रिकाओं में भेजते थे जो अक्सर खेद सहित वापस आ भी जाती थी और अगर छपती तो भी काट -छांट कर |अब कम्प्यूटर के समय में लेखको को एक एक खुला मंच मिल गया है जिससे वो अपनी बात ज्यूँ का त्यूं रख सकते है |किसी भी विधा में आसानी से अपनी रचना बिना काटे छांटे लिखी जा सकती है ,अब कटने छंटने का कोई डर नहीं है |”

    seemakanwal के द्वारा
    September 25, 2013

    हार्दिक आभार करूं जी .

Ritu Gupta के द्वारा
September 25, 2013

उत्तम लेख सीमा जी बधाई

    seemakanwal के द्वारा
    September 25, 2013

    हार्दिक आभार रितुजी .आभार

vaidya surenderpal के द्वारा
September 25, 2013

सही कहा सीमा जी हिन्दी ब्लागिंग एक सार्थक और क्रांतिकारी कदम है। सुन्दर आलेख के लिए बधाई।

    seemakanwal के द्वारा
    September 25, 2013

    हार्दिक धन्यवाद .

SATYA SHEEL AGRAWAL के द्वारा
September 25, 2013

सीमा जी ,आपकी बात से पूर्तायाह सहमत हूँ,मेरे ब्लॉग पर अपने विचार भेजें धन्यवाद

    seemakanwal के द्वारा
    September 25, 2013

    हार्दिक आभार अग्रवालजी .

yogi sarswat के द्वारा
September 25, 2013

हिंदी भाषा में लिखना मेरे विचार से हिंदी ब्लागिंग को बढ़ावा ही दे रहा है |अधिक से अधिक लोग अंतर्जाल का उपयोग कर ब्लाग लेखन कर रहे हैं |मुझे स्वयम मेरे भाई ने कहा की तुम्हें लिखने का शौक है तो कोई ब्लाग की साईट देख कर उसकी सदस्य बन जाओ तुम्हारी रचनात्मकता को बढ़ावा मिलेगा |उन्होंने खुद जागरण जंक्शन का मंच खोज कर दिया था | अपने लेखन को मंच दे दिया आपने ! बढ़िया लेख

    seemakanwal के द्वारा
    September 25, 2013

    HARDIK आभार .

Bhagwan Babu 'Shajar' के द्वारा
September 25, 2013

बहुत ही सही और सटीक लेख….

    seemakanwal के द्वारा
    September 25, 2013

    DHANYWAD SRITAJI .

sinsera के द्वारा
September 25, 2013

बहुत ही प्यार से लिखा है आपने सीमा जी ..भावात्मक लेख..आभार..

    seemakanwal के द्वारा
    September 25, 2013

    धन्यवाद भगवानजी .

PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
September 24, 2013

सीमा ,भविष्य उत्तम होगा .ना डरो ..बस …..ओम .शांति ..शांति ..शांति…….कहते रहो ….

    seemakanwal के द्वारा
    September 25, 2013

    समर्थन हेतु आभार .

bhanuprakashsharma के द्वारा
September 22, 2013

सही कहा आपने, हिंदी को कोई डर नहीं है। ऐसे में क्यों डरना। 

    seemakanwal के द्वारा
    September 22, 2013

    सही कहा आपने ,हार्दिक आभार

September 21, 2013

इसकी अपनी आन बान है जगमग करता संविधान है सही कहा सीमा जी

    seemakanwal के द्वारा
    September 21, 2013

    शालिनी जी हार्दिक आभार .

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
September 20, 2013

इसकी अपनी आन बान है जगमग करता संविधान है सपनों सी है देवनागरी , आदरणीया सीमा जी सच में अपनी बुलंद हिंदी अपना मुकाम हासिल करेगी ये एक समृद्ध भाषा है जरुरत है इस भरपूर समर्थन व् प्यार देने की काश शासन भी जागे … भ्रमर ५

    seemakanwal के द्वारा
    September 21, 2013

    आदरणीय भ्रमर जी हार्दिक धन्यवाद .

Pradeep Kesarwani के द्वारा
September 20, 2013

इसकी अपनी आन बान है जगमग करता संविधान है….ये शब्द ही हिंदी को असमान की बुलंदी तक पंहुचा देते हैं….सुन्दर अभिलेख आभार

    seemakanwal के द्वारा
    September 21, 2013

    प्रदीप जी हार्दिक आभार .

yamunapathak के द्वारा
September 20, 2013

सीमा जी शत प्रतिशत सही कहा हिंदी भाषा में हमारे विचार प्रवाहित होते है ,ह्रदय से निकलते है और कागज़ पर जन्म लेते है साभार

    seemakanwal के द्वारा
    September 21, 2013

    हार्दिक आभार ymuna ji .


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