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हिंदी दिवस पखवारे के आयोजन का कोई औचित्य है ,या बस यूँ ही चलता रहेगा ये सिलसिला|contest

Posted On: 15 Sep, 2013 Contest में

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विचारों के प्रवाह के आदान प्रदान के लिए मनुष्य ने भाषा का अविष्कार किया जिसमें विभिन्न स्थानों के
साथ विभिन्न भाषाएँ जन्म लेकर सामने आई |अशोक के समय में पाली भाषा का प्रयोग उसके बाद संस्कृत
भाष का विकास हुआ |मुग़ल कल में फारसी फिर उर्दू भाषा आम लोगों की भाषा बनीं |अंग्रेजों ने भारतीयों
को शारीरिक रूप से तो गुलाम बनाया ही साथ ही मानसिक दासता के लिए अंग्रेजी भाषा को ज़ंजीर बनाया
जो आज तक हम लोगों के मन मस्तिष्क को जकड़े हुए है जिससे आज हमारी पूरी संस्क्रति प्रभावित
हो रही है |
हम लोगों ने अपनी हिंदी भाषा को दोयम दर्जा देकर अंग्रेजी भाषा को सर आँखों पे बैठा लिया है |लोग
अपने को बेच कर भी चाहते है की उनकी संतान इंग्लिश स्कूल में पढ़ कर बाबु साहब बने |जब घर में कोई
अतिथि आता है तो अपने बच्चे को बुला कर कहेंगे बेटा अंकल ,आंटी को वो पोयम तो सुनाओ ,इयर कहाँ है ,
नोज़ कहाँ है ,फैन कहाँ है ?बच्चा यंत्र चालित सा बताता जाता है |ममता पिता का सीना गर्व से फूल
जाता है |ये तो हम लोगों की मानसिकता बन गई है |
चारों तरफ अंग्रेजी की होड़ मची है लोग हिंदी को पीछे करते जा रहे है ईसलिए हिंदी के प्रचार प्रसार के लिए
सरकार हिंदी राजभाषा पखवारा मनाने का निर्णय लिया जिससे हिंदी भाषा को उसका खोया सम्मान
वापस मिल जाये |लोगो की मानसिकता बदले कम से कम १५ दिन तो लोग हिंदी में काम कर सकें
हिंदी का बारे में सोचें |अगर हिंसी में काम करें तो शायद धीरे धीरे लोगों की आदत बन जाये इसलिए बैंक ,
रेलवे .कारखाने दूरभाष आदि सभी सरकारी विभागों में अनिवार्य रूप से हिंदी राजभाषा पखवारा मनाया
जाता है |
राजभाषा पखवारा मनाने का निर्णय यूँ ही नहीं लिया गया है इसके पीछे यही भावना है की ये पखवारा
मना के हम हिंदी भाषा को वही मान सम्मान दिला सकें जो स्वतंत्रता संग्राम के समय इस भाषा
को प्राप्त था |पुरे भारत में स्वतंत्रता की ज्वाला गाँधी जी ,नहरू ,तिलक ,भगत सिंह ,बोस गोखले
चाहे जिस भाषा के लोग हों एक सूत्र में हिंदी ने ही बांधा था |
पखवारा मनाते समय लोग हिंदी भाषा में काम करते कार्य शाला आदि का आयोजन करते है
तथा हिंदी में सर्वाधिक काम करने वाले को पुरुस्कार से सम्मानित भी किया जाता है जिससे लोगों
का हिंदी के प्रति प्रेम और उत्साह बढ़ता है |
इसी के अंतर्गत जागरण जंक्शन भी ये प्रतियोगिता आयोजित कर रहा है |इसमें सभी ब्लागर
साथी उत्साह पूर्वक प्रतिभाग कर रहें हैं और चिंतन मनन कर अच्छे से अच्छा लिखने का प्रयास
कर रहे हैं जो की हिंदी पखवारे के आयोजन का ही एक अंग है |इतने लोगों का हिंदी भाषा के प्रति
सोचना ,लिखना ,चितन मनन करना मात्र ओपचारिकता तो नहीं हो सकती ,कहीं न कहीं हम सब
इससे जुड़ते जा रहे हैं .इसके प्रति गंभीर विचार विमर्श प्रारंभ हो गया है अगर इस सिलसिले को जारी
रखा जाये इसमें गंभीरता बनी रहे तो निसंदेह हिंदी दिवस पखवारा हिंदी भाषा की लिए मील का पत्थर
साबित होगा |लोग आते जायेंगे और कारवां बन जायेगा |
पग पग वंदन द्वार सजाओ
घर ,दफ्तर ,संसार सजाओ
सिर्फ एक दिन ही क्यों इसका
हर दिन ये त्यौहार सजाओ

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17 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

yogi sarswat के द्वारा
September 19, 2013

इसी के अंतर्गत जागरण जंक्शन भी ये प्रतियोगिता आयोजित कर रहा है |इसमें सभी ब्लागर साथी उत्साह पूर्वक प्रतिभाग कर रहें हैं और चिंतन मनन कर अच्छे से अच्छा लिखने का प्रयास कर रहे हैं जो की हिंदी पखवारे के आयोजन का ही एक अंग है |इतने लोगों का हिंदी भाषा के प्रति सोचना ,लिखना ,चितन मनन करना मात्र ओपचारिकता तो नहीं हो सकती ,कहीं न कहीं हम सब इससे जुड़ते जा रहे हैं .इसके प्रति गंभीर विचार विमर्श प्रारंभ हो गया है अगर इस सिलसिले को जारी रखा जाये इसमें गंभीरता बनी रहे तो निसंदेह हिंदी दिवस पखवारा हिंदी भाषा की लिए मील का पत्थर साबित होगा |लोग आते जायेंगे और कारवां बन जायेगा | बहुत सही कहा आपने आदरणीय सीमा जी !

    seemakanwal के द्वारा
    September 20, 2013

    योगी जी हार्दिक आभार .

yamunapathak के द्वारा
September 18, 2013

पखवारा या हिन्दी दिवस मनाने में कोई बुराई नहीं है jin बातों को हम महत्व देते हैं उसी का उत्साह मनाते हैं उत्तम आलेख साभार

    seemakanwal के द्वारा
    September 20, 2013

    यमुना जी आप आई बहुत अच्छा लगा .सादर आभार .

PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
September 18, 2013

सीमा जी ,  गरीबी हटाओ नारों से गरीबी नही हट सकी, हिंदी दिवस , पखवारों या नारों से हिंदी नहीं फल सकेगी , बस,,    ओम ..शांति …शांति …शांति …का जाप करते शांति का अनुभव कर सकते हैं ,,

    seemakanwal के द्वारा
    September 20, 2013

    अपना अपना नजरिया है .हार्दिक आभार

PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
September 18, 2013

सीमा जी ,  गरीबी हटाओ नारों से गरीबी नही हट सकी                                                                              हिंदी दिवस , पखवारों या नारों से हिंदी नहीं फल सकेगी ,,      बस,,                                                            ओम ..शांति …शांति …शांति …का जाप करते शांति का अनुभव कर सकते हैं ,,

nishamittal के द्वारा
September 16, 2013

सीमा जी केवल पखवारे से नहीं अपितु व्यवहार के रूप में हिंदी को ह्रदय से अपना कर ही आगे बढ़ा जा सकता है

    seemakanwal के द्वारा
    September 16, 2013

    निशाजी आप ने बिलकुल ठीक कहा | सादर आभार

ushataneja के द्वारा
September 15, 2013

.इसके प्रति गंभीर विचार विमर्श प्रारंभ हो गया है अगर इस सिलसिले को जारी रखा जाये इसमें गंभीरता बनी रहे तो निसंदेह हिंदी दिवस पखवारा हिंदी भाषा की लिए मील का पत्थर साबित होगा |लोग आते जायेंगे और कारवां बन जायेगा | बहुत खूब!

    seemakanwal के द्वारा
    September 16, 2013

    hardik abhar ushaji

Pradeep Kesarwani के द्वारा
September 15, 2013

बिलकुल सही कहा आपने लोग आते जायेंगे और कारवां बन जायेगा ….. सुंदर लेख बधाई स्वीकारें !!!

    seemakanwal के द्वारा
    September 16, 2013

    प्रदीप जी हार्दिक आभार .

jlsingh के द्वारा
September 15, 2013

जागरण जंक्शन भी ये प्रतियोगिता आयोजित कर रहा है |इसमें सभी ब्लागर साथी उत्साह पूर्वक प्रतिभाग कर रहें हैं और चिंतन मनन कर अच्छे से अच्छा लिखने का प्रयास कर रहे हैं जो की हिंदी पखवारे के आयोजन का ही एक अंग है |इतने लोगों का हिंदी भाषा के प्रति सोचना ,लिखना ,चितन मनन करना मात्र ओपचारिकता तो नहीं हो सकती ,कहीं न कहीं हम सब इससे जुड़ते जा रहे हैं .इसके प्रति गंभीर विचार विमर्श प्रारंभ हो गया है अगर इस सिलसिले को जारी रखा जाये इसमें गंभीरता बनी रहे तो निसंदेह हिंदी दिवस पखवारा हिंदी भाषा की लिए मील का पत्थर साबित होगा |लोग आते जायेंगे और कारवां बन जायेगा | आदरणीया सीमा जी, निश्चित ही जागरण का यह कदम सराहनीय है!

    seemakanwal के द्वारा
    September 16, 2013

    हार्दिक आभार जवाहर जी ,सादर आभार .

Bhagwan Babu के द्वारा
September 15, 2013

पखवारे का आयोजन सिर्फ एक रस्म बना देता है …. कर्म कही खो जाता है… सुन्दर लेख…

    seemakanwal के द्वारा
    September 16, 2013

    आभार भगवान जी


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