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एक बार आ जाओ कान्हा लेकर अवतार .....

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त्रेता युग में कहा था तुमने
क्या भूल गये खेवनहार ,
जब जब बढ़ेगा धरती पे
पापों का भार ,मै आऊंगा
तब ले कर ,एक नया अवतार।
याद तुम्हें है ,या
भूल गये कन्हाई
देख रहे हो जग में
कैसी विपदा आई
छाया है चहूँ ओर
घोर अंधकार
कब आओगे तुम
लेकर के अवतार।
घूम रहे कंस ,तड़का
होकरके स्वछंद
यमुना नीर बहाए
नहीं है कूल कदम्ब
कालिया के विष से
मचा है हाहाकार
कब आओगे तुम
लेकर के अवतार।
काम  क्रोध में
मस्त हैं शासक
धन के लोभ में
मस्त प्रशासक
तुमने किया कितने
दानव ल संहार
कब आओगे तुम
लेकर के अवतार।
हे अरिहंता ,रास रच्या
हे राधा के सखा
देख नहीं पाते  तुम
हम सबकी व्यथा
सुरसा की मुख की भांति
बढ़ता अत्याचार
कब आओगे तुम
लेकर के अवतार।

त्रेता युग में कहा था तुमने

क्या भूल गये खेवनहार ,

जब जब बढ़ेगा धरती पे

पापों का भार ,मै आऊंगा

तब ले कर ,एक नया अवतार।

याद तुम्हें है ,या

भूल गये कन्हाई

देख रहे हो जग में

कैसी विपदा आई

छाया है चहूँ ओर

घोर अंधकार

कब आओगे तुम

लेकर के अवतार।

घूम रहे कंस ताड़का

होकरके स्वछंद

यमुना नीर बहाए

नहीं है कूल कदम्ब

कालिया के विष से

मचा है हाहाकार

कब आओगे तुम

लेकर के अवतार।

काम  क्रोध में

मस्त हैं शासक

धन के लोभ में

मस्त प्रशासक

तुमने किया कितने

दानव का संहार

कब आओगे तुम

लेकर के अवतार।

हे अरिहंता ,रास रच्या

हे राधा के सखा

देख नहीं पाते  तुम

हम सबकी व्यथा

सुरसा की मुख की भांति

बढ़ता अत्याचार

कब आओगे तुम

लेकर के अवतार।

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18 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

    seemakanwal के द्वारा
    September 10, 2013

    हार्दिक आभार अजय जी .

nishamittal के द्वारा
September 4, 2013

सुन्दर भावपूर्ण

    seemakanwal के द्वारा
    September 5, 2013

    हार्दिक धन्यवाद निशाजी .सादर .

RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
September 4, 2013

भावपूर्ण कविता .

    seemakanwal के द्वारा
    September 4, 2013

    aadrniy rajeev ji hardik abhar .

yogi sarswat के द्वारा
September 2, 2013

याद तुम्हें है ,या भूल गये कन्हाई देख रहे हो जग में कैसी विपदा आई छाया है चहूँ ओर घोर अंधकार कब आओगे तुम लेकर के अवतार। घूम रहे कंस ताड़का होकरके स्वछंद यमुना नीर बहाए नहीं है कूल कदम्ब कालिया के विष से मचा है हाहाकार कब आओगे तुम लेकर के अवतार। अभी शायद पूरी तरह कलियुग नहीं आया इसीलिए भगवान् इंतज़ार कर रहे हैं ! सुन्दर शब्द

    seemakanwal के द्वारा
    September 2, 2013

    आपने ठीक कहा अभी पूरी शयद कलयुग नहीं आया .सादर आभार .

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
September 1, 2013

घूम रहे कंस ताड़का होकरके स्वछंद यमुना नीर बहाए नहीं है कूल कदम्ब कालिया के विष से मचा है हाहाकार प्रभु जनमानस की टेर सुनो दर्द देखो आ जाओ उबारो ….सुन्दर रचना आदरणीया सीमा जी जय श्री कृष्ण भ्रमर 5

    seemakanwal के द्वारा
    September 2, 2013

    आदरनीय भ्रमर जी हार्दिक आभार

yatindrapandey के द्वारा
September 1, 2013

हैलो सीमा जी नन्द किशोर बाल गोपाल के लिए सुन्दर शब्दों के साथ व्याख्यान

    seemakanwal के द्वारा
    September 2, 2013

    यतीन्द्र जी प्रतिक्रिया के लिए सादर आभार .

September 1, 2013

बहुत सुन्दर भावपूर्ण .

    seemakanwal के द्वारा
    September 1, 2013

    shalini ji hardik abhar .

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
September 1, 2013

सार्थक और समयानुकूल प्रस्तुति पर आप को बधाई !

    seemakanwal के द्वारा
    September 1, 2013

    haedik abhar acharya ji .

bhanuprakashsharma के द्वारा
September 1, 2013

यथार्थ को चित्रित करती भावपूर्ण रचना। बधाई। 

    seemakanwal के द्वारा
    September 1, 2013

    bhanuji hardik dhanywad .


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