kavita

Just another weblog

72 Posts

1087 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 10099 postid : 584293

jagran junction fourm ,एक फूल और एक मोती से बने न कोई हार....

  • SocialTwist Tell-a-Friend

>प्राचीन काल नारी घर से बाहर नहीं निकलती थीं |उनकी शिक्षा का भी कोई ठिकाना नहीं था उन्हें पर्दे में
रखा जाता था |बचपन में मत पिता ,भाई विवाह के बाद पति के अधीन रहती थीं |पति उनका भरण पोषण
करता था |नारी सदा घर में रहकर सारे काम करती थी .
लेकिन आज सभी लोग शिक्षा का महत्व समझ गये हैं .लडकियाँ पढ़ रही हैं और भविष्य में कुछ न कुछ
अपने बल पर करना चाहती हैं आज की लडकियों के लिए करियर पहले और विवाह दुसरे नंबर पे आता
है .नारी और पुरुष दोनों ही संसार रूपी परिवार के do पहिये हैं इन्हीं दोनों से सुर्ष्टि का नीर्माण हुआ .
प्रत्येक धर्म में शादी को आवश्यक माना गया है.हिन्दू धर्म में कन्यादान
को सबसे बड़ा दान माना गया है तो मुस्लिम में विवाह को सुन्नत रसूल अल्लाह कहा गया है.जिसे
करना जरूरी है .
हम लोग कई नमी गिरामी अविवाहित महिलाओं को जानते है जो अपने जीवन में बहुत सफल है .
लेकिन हमारे आपके आसपास भी नज़र डालिए तो जरुर अकेली महिला मिल जाएँगी जो अकेले
रहती हों हाँ सारी अकेली महिलाओं में एक बात समान होगी वोह आत्मनिर्भर जरुर होंगी ..

—————————-जैसा कई सभी धर्मों में विवाह को जरूरी माना गया है लेकिन कोई महिला
अकेली रहे तो क्या वो अधूरी है पुरुष के बिना ,नहीं बिलकुल नहीं .उसका अलग अपना व्यक्तित्व
है समाज में एक मोकाम है .वो कभी भी पुरुष के बिना अधूरी नहीं है .
हाँ ये जरुर है भगवन ने जब विवाह नाम कई संस्था बने है तो विवाह दोनों के लिए आवश्यक
है .परिवार का जन्म विवाह से ही होता है हर इन्सान चाहे नर हो या नारी वो अपने में पूर्ण होता
है विवाह का ये अर्थ नहीं है कि महिला अधूरी है और उसे एक सहारे कि जरूरत है ..
बल्कि मैंने तो ये देखा है आप ने भी गौर किया होगा कि पति कि म्रत्यु के बाद पत्नी बच्चों
को लेकर पूरा जीवन बिता देती है परन्तु पत्नी के देहांत के बाद पति अक्सर शादी कर ही लेते है
कारण चाहे जो भी पेश करें .|तो देखा जाये तो सहारे कि जरूरत तो पुरुष को ही पडती है ,महिलाएं
तो घर बाहर दोनों सम्हाल लेती है परन्तु पुरुष घर बाहर दोनों नहीं सम्हाल पाते हैं |
फिर भी …………………….
एक फूल और एक मोती से बने न कोई हार .
जब भगवान ,खुदा ,गॉड ने कायनात को बनाना चाहा तो पहले श्रद्धा मनु ,आदम हव्वा ,या एडम इवा
को ही बनाया जिस से संसार आगे बढ़े |
भगवान तो सर्व शक्तिमान है अगर वो चाहते तो केवल पुरुष या केवल नारी से ही कायनात का
निर्माण करते लेकिन उन्होंने दोनों को एक दुसरे का पूरक बनाया क्यूंकि .
………….
एक फूल और एक मोती से
बने न कोई हार
इन्हें बनाया भगवन ने
इक दूजे का श्रृगार
यहाँ से शुरू हुआ
शुरू हुआ ,
शुरू हुआ संसार

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

14 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Jaishree Verma के द्वारा
August 28, 2013

जी हाँ ! आपने सही कहा सीमा कँवल जी ईश्वर ने दोनों को एक दूसरे का पूरक बनाया है ! दोनों में कोई भी छोटा या बड़ा नहीं है !

    seemakanwal के द्वारा
    August 28, 2013

    hardik abhar jaishree.

yogi sarswat के द्वारा
August 27, 2013

आदरणीया सीमा कँवल जी, संवेदना तथा अनुभूति से उपजे अत्यंत अर्थवान, प्रभावपूर्ण और पठनीय प्रस्तुति के लिए हार्दिक साधुवाद एवं सद्भावनाएँ ! ” देखा जाये तो सहारे कि जरूरत तो पुरुष को ही पडती है ,महिलाएं तो घर बाहर दोनों सम्हाल लेती है परन्तु पुरुष घर बाहर दोनों नहीं सम्हाल पाते हैं |” आपने लड़कियों का जिक्र किया है लेकिन अभी लड़कियों में ही ऐसी ज्यादा आबादी है जिसे करियर नाम का शब्द भी नहीं मालूम ! उसे अपनी डेस्टिनी पता है की मुझे किसी और के घर जाना है , वहां खाना बनाना है , बच्चे पालने हैं और पति से पिटना है ! जब तक उस वर्ग की लड़कियों तक बात नहीं पहुँचती , बेमाने होगा ! शानदार लेखन !

    seemakanwal के द्वारा
    August 27, 2013

    yogi ji hardik abhar .

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
August 23, 2013

आइये सब संजोया जाए ..प्रेम से पिरोया जाए प्यारे फूलों को ..तो माला बन ही जायेगी ….नर नारी एक दूजे के पूरक हैं प्रेरक हैं श्रृष्टि की रचना में प्रभु के आज्ञाकारी हैं ….सार्थक लेख और रचना भ्रमर ५

    seemakanwal के द्वारा
    August 25, 2013

    hardik abhar surendeeraji.

Santlal Karun के द्वारा
August 23, 2013

आदरणीया सीमा कँवल जी, संवेदना तथा अनुभूति से उपजे अत्यंत अर्थवान, प्रभावपूर्ण और पठनीय प्रस्तुति के लिए हार्दिक साधुवाद एवं सद्भावनाएँ ! ” देखा जाये तो सहारे कि जरूरत तो पुरुष को ही पडती है ,महिलाएं तो घर बाहर दोनों सम्हाल लेती है परन्तु पुरुष घर बाहर दोनों नहीं सम्हाल पाते हैं |”

    seemakanwal के द्वारा
    August 23, 2013

    hardik abhar karunji .

Madan Mohan saxena के द्वारा
August 22, 2013

बेह्तरीन अभिव्यक्ति …!!शुभकामनायें.

    seemakanwal के द्वारा
    August 23, 2013

    madanji hardik dhanywad.

harirawat के द्वारा
August 22, 2013

सीमा जी सुन्दर अभिव्यक्ति और सार्थक लेख के साथ खूब सूरत कुछ कविता की पंक्तियाँ भी. बधाई ! अगर नर के बिना नारी अधूरी है तो नारी के बिना नर भी अधूरा है ! हाँ, एक बात और सभी आदमी दूसरी शादी नहीं करते तो कुछ नारी भी दूसरे विबाह से ऐतराज नहीं करते !

    seemakanwal के द्वारा
    August 23, 2013

    rawatji hardik abhar

deepakbijnory के द्वारा
August 21, 2013

एकदम दुरुस्त फ़रमाया सीमा जी

    seemakanwal के द्वारा
    August 23, 2013

    deepakji bahut shukriya .


topic of the week



latest from jagran