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यही तो बसंत है ….

कानों में रस घोले
कोयल बोले हौले -हौले
आमों पे बौर डोले
मन में हिचकोले
छा रही चार सूं मादक सुगंध है
यही तो बसंत है ,यही तो बसंत है .
ओढ़ ली धरा ने
धानी सी चुनर है
माथे पे सजाया
सोने का झूमर है
कहाँ से चुराया ,
रूप ये अनंत है
यही तो बसंत है ,यही तो बसंत है .
नयनों में आस लिए
अधरों पे प्यास लिए
कर रही प्रतीक्षा गोरी
संग मधुमास लिए
उठती ह्रदय में
उत्ताल सी उमंग है
यही तो बसंत है ,यही तो बसंत है .
बेला फुले ,टेसू फुले
फूला पलाश है ,
धरती के संग संग
नाचे आकाश है
चढ़ आया यौवन
प्रकृति पे दिग दिगंत है
यही तो बसंत है ,यही तो बसंत है .



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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

bebakvichar, KP Singh (Bhind) के द्वारा
March 6, 2013

बेला फुले ,टेसू फुले फूला पलाश है , धरती के संग संग नाचे आकाश है चढ़ आया यौवन प्रकृति पे दिग दिगंत है यही तो बसंत है ,यही तो बसंत है . सीमाजी, वासंती प्रकृति की अत्यंत सुंदर कृति,……..साभार

    seemakanwal के द्वारा
    March 6, 2013

    bahut -bahut abhar k. p. singh ji . hardik dhanywad .

aman kumar के द्वारा
February 27, 2013

आपकी कविता ने बसंत सामने खड़ा कर दिया ! प्रकृति पर कविता तन मन को तरोताजा कर देती है |

    seemakanwal के द्वारा
    February 28, 2013

    aman ji hardik dhanywad .

bhagwanbabu के द्वारा
February 25, 2013

सुन्दर प्रस्तुति … सच मे यही तो वसंत है….. बधाई… http://bhagwanbabu.jagranjunction.com/2013/02/22/सेक्स-से-खिलवाड़-–-jagran-junction-forum/

    seemakanwal के द्वारा
    February 25, 2013

    hardik abhar bhagwanbabuji .

Dhavlima Bhishmbala के द्वारा
February 24, 2013

आदरणीय मैम, प्रकृति को आपने कितनी खूबसूरती से अपनी शब्दों से सजा दिया है जिसकी खुशबू मैं महसूस कर सकती हूँ |

    seemakanwal के द्वारा
    February 25, 2013

    comment ke liye hardik abhar dhavlima ji ..

Shweta के द्वारा
February 24, 2013

बेहद खूबसूरत चित्रण किया है बसंत का ………..

    seemakanwal के द्वारा
    February 24, 2013

    shwetaji hardik abhar .

vinitashukla के द्वारा
February 20, 2013

बसंत ऋतु का सजीव और प्रभावी चित्रण. बधाई सीमा जी.

    seemakanwal के द्वारा
    February 21, 2013

    haedik abhar winitaji .

div81 के द्वारा
February 20, 2013

सीमा जी, बसंत ऋतू का बहुत है सुंदर और मनमोहक चित्रण महका महका सा दिन चला महकी महकी सी रात चली बही बसंती बयार जो साथ फ़िज़ा मैं महक चली बधाई …… 

    seemakanwal के द्वारा
    February 20, 2013

    bahut shukriya . welcome to my blog .

Malik Parveen के द्वारा
February 20, 2013

सीमा जी बसंत ऋतू का मोहक चित्रण करती रचना … बधाई …

    seemakanwal के द्वारा
    February 20, 2013

    many thanks welcome to my blog .

shalinikaushik के द्वारा
February 19, 2013

बहुत सुन्दर भावनात्मक प्रस्तुति . दामिनी गैंगरेप कांड :एक राजनीतिक साजिश ? आप भी जानें हमारे संविधान के अनुसार कैग [विनोद राय] मुख्य निर्वाचन आयुक्त [टी.एन.शेषन] नहीं हो सकते

    seemakanwal के द्वारा
    February 20, 2013

    hardik abhar shaliniji .

yogi sarswat के द्वारा
February 19, 2013

आदरणीय सीमा जी, सादर नमस्कार ! बहुत सुन्दर प्रवाहमय बसंत का स्वागत-गीत ! “बेला फूले, टेसू फूले फूला पलाश है , धरती के संग-संग नाचे आकाश है चढ़ आया यौवन मदमस्त दिग-दिगंत है यही तो बसंत है ,यही तो बसंत है .”” बहुत बेहतरीन ! सादर ! अति सुन्दर

    seemakanwal के द्वारा
    February 20, 2013

    hardik dhanywad yogiji .

Ravinder kumar के द्वारा
February 18, 2013

सीमा जी, सादर नमस्कार. बेला फुले ,टेसू फुले फूला पलाश है , धरती के संग संग नाचे आकाश है चढ़ आया यौवन प्रकृति पे दिग दिगंत है यही तो बसंत है ,यही तो बसंत आपने बिल्कुल सही कहा के यही बसंत है. सीमा जी, कष्ट इस बात का है के बसंत अब केवल कविताओं में ही दिखता है. शायद ही किसी को पता हो, बेला, टेसू, पलाश के बारे में. हमारे पास ही वन विभाग ने ऐसे पौधे लगाए हैं जो पतझड़ में हरे होते हैं और बसंत में सूख जाते हैं. बेहतरीन कविता के माध्यम से बसंत की याद दिलाने के लिए आपको बधाई. शुभकामनाएं.

    seemakanwal के द्वारा
    February 20, 2013

    hardik abhar ravinder ji . aap ne sach hi kaha hai .

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
February 18, 2013

आप की यह कविता पढ़कर मन पलास- पलास हो गया ! सीमा जी बधाई !!

    seemakanwal के द्वारा
    February 18, 2013

    hardik abhar acharyaji

Sushma Gupta के द्वारा
February 18, 2013

सीमा जी, आपकी वासंतिक रंगों में रंगी हुई सुन्दर कविता पदकर तो सचमुच मन में उठ रही उमंग ही उमंग है , हाँ ,यही तो वसंत है …इसके लिए बहुत – बहुत वधाई सहित मेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत ….

    seemakanwal के द्वारा
    February 18, 2013

    hardikdhanywad sushmaji .

sinsera के द्वारा
February 17, 2013

खुबसूरत कविता सीमा जी, पढ़ कर लगा जैसे कमरे में ही चारो और बसंत छा गया…

    seemakanwal के द्वारा
    February 18, 2013

    ye meri rchna ka nhin basant ka asr hai . hardik abhar sritaji .

krishnashri के द्वारा
February 17, 2013

आदरणीय महोदया , सादर , बसंत के आगमनं का सुन्दर चित्रण , सफल प्रस्तुति , बधाई

    seemakanwal के द्वारा
    February 18, 2013

    adrniy sar ji hardik abhar .

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
February 17, 2013

आदरणीया सीमा जी सादर वसंत का सुन्दर चित्रण बधाई

    seemakanwal के द्वारा
    February 17, 2013

    hardik abhar adrniy kushwaha ji .

sanjeevrai के द्वारा
February 16, 2013

बसंत ऋतु का बहुत सुन्दर वर्णन किया है आपने| धन्यवाद

    seemakanwal के द्वारा
    February 17, 2013

    sanjeevji hardik dhanywad .

shashibhushan1959 के द्वारा
February 16, 2013

आदरणीय सीमा जी, सादर ! बहुत सुन्दर प्रवाहमय बसंत का स्वागत-गीत ! “बेला फूले, टेसू फूले फूला पलाश है , धरती के संग-संग नाचे आकाश है चढ़ आया यौवन मदमस्त दिग-दिगंत है यही तो बसंत है ,यही तो बसंत है .”" बहुत बेहतरीन ! सादर !

    seemakanwal के द्वारा
    February 17, 2013

    adrniy shshiji bahut bahut abhar .

nishamittal के द्वारा
February 16, 2013

बसंत के सुन्दर चित्रण पर हार्दिक बधाई सीमा जी.रचना बहुत सुन्दर है .

    seemakanwal के द्वारा
    February 17, 2013

    hardik abhar nishaji .

February 16, 2013

ओढ़ ली धरा ने धानी सी चुनर है माथे पे सजाया सोने का झूमर है कहाँ से चुराया , रूप ये अनंत है यही तो बसंत है ,यही तो बसंत है , बहुत बढ़िया वर्णन बसंत का ….. सीमा जी , शुभकामना

    seemakanwal के द्वारा
    February 17, 2013

    adrniy sinhaji hardik dhanywad .

alkargupta1 के द्वारा
February 15, 2013

सीमा जी , वसंत का अति सुन्दर चित्रण…..

    seemakanwal के द्वारा
    February 17, 2013

    bahut shukriya alkaji .

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
February 15, 2013

ओढ़ ली धरा ने धानी सी चुनर है माथे पे सजाया सोने का झूमर है कहाँ से चुराया , रूप ये अनंत है सुन्दर वर्णन वासंती मौसम मन में सुगंध भर ही जाता है …. भ्रमर ५

    seemakanwal के द्वारा
    February 17, 2013

    rchna ap ko psand aai hardik abhar surendraji .

Manoj Kumar Manjul के द्वारा
February 15, 2013

कविता अच्छी है । प्रकृति के सौन्दय को लयबद्ध ढंग से प्रस्तुत करने हेतु धन्यवाद।

    seemakanwal के द्वारा
    February 17, 2013

    adrniy mnojji hardik dhanywad .




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