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seemakanwal


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तुझको चलना होगा …

Posted On: 23 Nov, 2013  
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Others Others कविता न्यूज़ बर्थ में

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बुरा जो देखन मैं चला ….

Posted On: 11 Nov, 2013  
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Others कविता ज्योतिष में

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तुम दीवाली बनकर …………

Posted On: 26 Oct, 2013  
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Others Others कविता ज्योतिष में

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ज़िन्दगी ……

Posted On: 22 Oct, 2013  
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Others social issues कविता पॉलिटिकल एक्सप्रेस में

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धूल धूसरित फूल हैं ….

Posted On: 30 Sep, 2013  
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Business Others Others social issues में

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“हिंदी हमारे लिए गर्व की भाषा है”" contest ”

Posted On: 9 Sep, 2013  
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Contest में

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एक बार आ जाओ कान्हा लेकर अवतार …..

Posted On: 28 Aug, 2013  
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Celebrity Writer Contest Entertainment Hindi News में

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इसी के अंतर्गत जागरण जंक्शन भी ये प्रतियोगिता आयोजित कर रहा है |इसमें सभी ब्लागर साथी उत्साह पूर्वक प्रतिभाग कर रहें हैं और चिंतन मनन कर अच्छे से अच्छा लिखने का प्रयास कर रहे हैं जो की हिंदी पखवारे के आयोजन का ही एक अंग है |इतने लोगों का हिंदी भाषा के प्रति सोचना ,लिखना ,चितन मनन करना मात्र ओपचारिकता तो नहीं हो सकती ,कहीं न कहीं हम सब इससे जुड़ते जा रहे हैं .इसके प्रति गंभीर विचार विमर्श प्रारंभ हो गया है अगर इस सिलसिले को जारी रखा जाये इसमें गंभीरता बनी रहे तो निसंदेह हिंदी दिवस पखवारा हिंदी भाषा की लिए मील का पत्थर साबित होगा |लोग आते जायेंगे और कारवां बन जायेगा | बहुत सही कहा आपने आदरणीय सीमा जी !

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जागरण जंक्शन भी ये प्रतियोगिता आयोजित कर रहा है |इसमें सभी ब्लागर साथी उत्साह पूर्वक प्रतिभाग कर रहें हैं और चिंतन मनन कर अच्छे से अच्छा लिखने का प्रयास कर रहे हैं जो की हिंदी पखवारे के आयोजन का ही एक अंग है |इतने लोगों का हिंदी भाषा के प्रति सोचना ,लिखना ,चितन मनन करना मात्र ओपचारिकता तो नहीं हो सकती ,कहीं न कहीं हम सब इससे जुड़ते जा रहे हैं .इसके प्रति गंभीर विचार विमर्श प्रारंभ हो गया है अगर इस सिलसिले को जारी रखा जाये इसमें गंभीरता बनी रहे तो निसंदेह हिंदी दिवस पखवारा हिंदी भाषा की लिए मील का पत्थर साबित होगा |लोग आते जायेंगे और कारवां बन जायेगा | आदरणीया सीमा जी, निश्चित ही जागरण का यह कदम सराहनीय है!

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मुझे तीन बातो से नफरत है 1. मैं अपनी बेटी को बेटा मानता हूँ 2. ये मेरी लड़की नहीं लड़का है 3. यह लड़की लड़को की तरह बहादूर है मुझे समझ नहीं आता आखिर लड़कियों की प्रतिभायें को लड़को से तुलना करके क्यों दिखाया जाता है। क्या सीधे तौर पर े नहीं कहा जा सकता है कि यह लड़की है और इसकी यह विशेषता ही होती है। क्या किसी ने ये कहा है कि ये मेरा बेटा नहीं बेटी है या इसमें लड़के में लड़की जैसी मानवताहै। असल में पुरूष कभी नारी के बराबर हो ही नहीं सकती। हम पुरूष कोसो दूर है नारियों से। कई ऐसे लोग भी है जो बेटियों का सर्पोट तो करते है पर कह देते है कि यह मेरा बेटा है। अरे भाई आप अपनी बेटियों में बेटो का अक्स क्यो खोजते हो कहीं ऐसा तो नहीं कि आप बेटा ही चाह रहे थे और बेटी हुयी तो आपको मलाल हुआ पर आपने उसे ही लड़को जैसा बनाना शुरू कर दिया । सोचिए क्या आप उसके अस्तित्व को तो छीन नहीं रहे

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आपका लेख बिल्कुल साफ और स्वस्थ है...  इसमे कोई दो राय नही... लेकिन जो मुद्दा आपने उठाया है... वह बहुत पेचीदा है... क्योंकि ये समस्या जो आज दिखाई दे रही है.... वह बहुत पहले से ही किए गए कर्मो का फल है...... और इसमे महिलाए खुद ज्यादा जिम्मेदार है..... स्त्री खुद को पुरूष समझने लगी है... यही समस्या है.... प्रवचन अच्छे लगते है कि.............. नर और नारी एक समान........... लेकिन इसी आड मे कही न कही महिलाए अपनी जिम्मेदारी भी भूल रही है जिससे ये समस्या उत्पन्न हो रही है..... इसे ठंढे दिमाग से सोचे तो समझ मे आएगा ..... अन्यथा ये बहुत ही झगड़ालू वक्त्व्य है...... आपकी लेख मे स्व्च्छता के लिए धन्यवाद http://bhagwanbabu.jagranjunction.com/2013/02/05/%E0%A4%97%E0%A4%BC%E0%A5%81%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B9/

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आज तक संविधान में कितने ही संशोधन हुए हैं क्या एक संशोधन और नहीं हो सकता की जबरदस्ती की सज़ा फांसी निश्चित की जाये .मुझे तो डर है ऐसा विधेयक संसद में आया तो सारे सांसद बड़ी -बड़ी नैतिकता की ,मानवता की दलीलें दे कर फांसी का सज़ा का विधेयक पास ही नहीं होने देंगे आपसे सहमत हूँ ! लेकिन आप और हम ये भूल क्यूँ जाते हैं की ये लोग जो संसद में बैठे हैं वो कोई दूसरे गृह से नहीं आये हैं , वो हमारे बीच में से ही निकले हैं और सच कहूँ तो हमने ही उन्हें यहाँ तक पहुँचाया है , फिर असल जिम्मेदार कौन हुआ ? क्या हम ऐसा नहीं कर सकते की जो भी पार्टी बलात्कारी को टिकट दे , उसके चुने जाने से पहले ही अपना विरोध दर्ज कराएं और उसे किसी भी सूरत में संसद या विधान सभा तक न पहुँचने दें ? शायद कोई अच्छी तस्वीर निकल कर आये ?

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के द्वारा: कुमारेन्द्र सिंह सेंगर कुमारेन्द्र सिंह सेंगर

के द्वारा: dineshaastik dineshaastik

सुभान-अल्लाह सीमा जी, बजा फ़रमाया आपने ! मज़हब कोई भी हो अमन और भाई-चारे का ही पैगाम लाता है ! इन्सान का इंसान से मोहोब्बत का ज़ज्बा ही हर मज़हब का पैगाम है ! किन्तु कुछ दहशत पसंद मजहबी सियासतदान और गैर-जिम्मेदार मज़हबी उलेमाओं के कारण आज मुल्क का अमन-ओ-चैन लुट गया है ! ये लोग मज़हब के नाम पर इंसानों को बाँटते हैं और उनमे नफरत के बीज बोते हैं !वर्ना क्या वज़ह थी की असम की एक छोटी सी चिंगारी पूरे मुल्क में आग की मानिंद फ़ैल रही है ! ये कमज़र्फ लोग यही तो चाहते हैं की देश की अवाम आपसी रंजिश में एक-दुसरे के आशियानें जलाती रहे और इनकी सियासत बरक़रार रहे ! आग का क्या है, पल-दो-पल में लगती है , बुझते-बुझते एक ज़माना लगता है !

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सीमा जी, सादर नमस्कार. आज दोगलापन देश, समाज, परिवार और व्यक्ति के चरित्र का हिस्सा बन गया है. हम कुछ भी करें तो ठीक, दूसरा कोई करे तो गलत. घर में चोरी तो गलत लेकिन कार्यालय के काम में कमीशन खोरी अधिकार. यही हाल सरकार का है. किसी काम को आगे बढ़ाने में करोड़ों खर्च कर दिए जाते है. लेकिन अपनी गलत नीतियों से उसी काम की जड़ खोदने में भी पीछे नहीं हटते. सीमा जी, आप ने बिलकुल ठीक अंकन किया है के शासकीय कर्मचारी अपने काम के प्रति न तो जवाबदेह हैं न ही गंभीर. इसका प्रमाण यहाँ है के न्यायालयों में शासन के विरुध मुकदमों की भरमार है. आप ने बेहद गंभीर मुद्दा उठाया है. इसके लिए आप को बधाई और भविष्य के लिए शुभकामनाएं. नमस्ते जी.

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